परिणाम "basiirat"
Tap the Advanced Search Filter button to refine your searches
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँजो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँ घुँघटा में आग लगा देती
निगाह-ए-बसीरत से ये रम्ज़ पूछोकहाँ मैं नहीं हूँ कहाँ तुम नहीं हो
देख ले शान-ए-ख़ुदा गर है बसीरत तुझ कोसूरत-ए-पीर में ज़ाहिर है हक़ीक़त कैसी
कहते हैं उसे चश्म-ए-बसीरत कि वो देखेमज़हर में तेरी ज़ात का इज़हार है या-रब
देख तो चश्म-ए-बसीरत से उन्हें ऐ मुंकिरउन बुतों में ही तो है रंग नुमायाँ अपना
वो जो आए तो हुस्न-ए-बसीरत न था उन के जाते ही ताब-ए-नज़र आगईकल नज़ारा था लेकिन ये आँखें न थीं आज आँखें मिलीं तो नज़ारा गया
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
Urdu poetry, urdu shayari, shayari in urdu, poetry in urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books