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कलाम
अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ' भी थी परवाना भीरात के आख़िर होते होते ख़त्म था ये अफ़्साना भी
आरज़ू लखनवी
कलाम
मय-कदा-ए-’इश्क़ में मस्तों की मय-नोशी न पूछतोड़ दी ज़ाहिद ने तौबा बज़्म-ए-रिंदाँ देख कर
अमीर बख़्श साबरी
कलाम
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
महफ़िल-ए-रिंदाँ में जाम मुल का होना चाहिएज़ोहद का क़ुल हो चुका क़ुलक़ुल का होना चाहिए
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
ख़ुशी से दूर हूँ ना-आश्ना-ए-बज़्म-ए-’इशरत हूँसरापा दर्द हूँ वाबस्ता-ए-ज़ंजीर-क़िस्मत हूँ
शाह मोहसिन दानापुरी
कलाम
मैं तन्हा आब-ओ-रंग बज़्म-ए-इम्काँ हो नहीं सकताये दिल वापस अगर तू इस में मेहमाँ हो नहीं सकता
सीमाब अकबराबादी
कलाम
नहीं आश्ना मिरे हाल से कोई आँख बज़्म-ए-मजाज़ मेंहूँ वो आईन: जो है ना-तमाम अभी ज़ेहन-ए-आईनः-साज़ में
सीमाब अकबराबादी
कलाम
बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी हैतर्क-ए-तअल्लुक़ काम न आया उन से मोहब्बत आज भी है