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कलाम
कामिल शत्तारी
कलाम
सुण फ़रियाद पीराँ दिआ पीरा अरज़ सुणी कन धर के हूबेड़ा अड़या विच कपराँ दे जिथ मच्छ न बैहन्दे डर के हू
सुल्तान बाहू
कलाम
कलेजा थाम कर जब दिल दुखे फ़रियाद करते हैंबुतान-ए-संग-दिल उस दम ख़ुदा को याद करते हैं
जलील मानिकपुरी
कलाम
सुण फ़रियाद पीरां दिआ पीरा आख सुणावाँ कैनूँ हूतैं जेहा मैनूँ होर न कोई मैं जेहियाँ लक्ख तैनूं हू
सुल्तान बाहू
कलाम
ज़रा और मुस्कुरा लूँ दिल-ओ-जाँ शिकार-ए-ग़म हैंकि मसर्रतों के लम्हे मेरी ज़िंदगी में कम हैं
बहज़ाद लखनवी
कलाम
वो मस्त-ए-नाज़ आता है ज़रा हुशियार हो जानायहीं देखा गया है बे-पिए सरशार हो जाना
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
उस का ज़िक्र है जारी हर एक साँस के अंदरये मसअला अब तो पहचानूँ क्या हो जिस्म के अंदर
डा. इरशाद बल्ख़ी
कलाम
अनवर मिर्ज़ापुरी
कलाम
मैं बुरा हूँ या भला हूँ मेरी लाज को निभानामुझे जानता है साजन तेरे नाम से ज़माना