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कलाम
नसीम-ए-सुब्ह गुलशन में गुलों से खेलती होगीकिसी की आख़िरी हिचकी किसी की दिल लगी होगी
सीमाब अकबराबादी
कलाम
पड़ गई क्या लूट यारब गुलशन-ए-ईजाद मेंदस्त-ए-गुल-चीं में है गुल बुलबुल कफ़-ए-सैय्याद में
अमीर मीनाई
कलाम
वो आज़ादी से कर सकता नहीं परवाज़ गुलशन मेंजो बैठा है असीर-ए-एहतियाज-ए-बाल-ओ-पर हो कर
सीमाब अकबराबादी
कलाम
विदाअ'-ए-गर्दिश-ए-अय्याम था तर्क-ए-चमन मेरान फिर शाम-ए-ख़िज़ाँ आई न फिर सुब्ह-ए-बहार आई
सीमाब अकबराबादी
कलाम
सुकूँ है कुछ इसी से इज़्तिराब-ए-ज़िंदगानी मेंवगरना ज़ात-ए-बाक़ी पैकर-ए-इंसान-ए-फ़ानी में
सीमाब अकबराबादी
कलाम
ऐ जान-ए-जहाँ कब तक ये गोशा-ए-तन्हाईसब दीद के तालिब हैं जितने हैं तमाशाई
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
अभी महरम नहीं तो अश्क-ओ-आह-ए-आख़िर-ए-शब काहयात-अफ़रोज़ हैं आब-ओ-हवा-ए-दिल की तासीरें
सीमाब अकबराबादी
कलाम
वहाँ तस्कीन-ए-ख़ातिर चार दिन से हुस्न-ए-आसूदायहाँ आशोब-ए-पहलू इक दिल-ए-दीवाना बरसों से
सीमाब अकबराबादी
कलाम
सीमाब अकबराबादी
कलाम
अपनी निगाह-ए-शौक़ को रोका करेंगे हमवो ख़ुद करें निगाह तो फिर क्या करेंगे हम