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कलाम
ऐ जान-ए-जहाँ कब तक ये गोशा-ए-तन्हाईसब दीद के तालिब हैं जितने हैं तमाशाई
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
रू-ए-ज़ेबा गर न देखे चश्म वो है चश्म-कोरतिरे क़दमों पर न हो जब सर वबाल-ए-दोश है
अब्दुल हादी काविश
कलाम
मोहम्मद मुस्तफ़ा को हज़रत-ए-यूसुफ़ से क्या निस्बतवो मतलूब-ए-ज़ुलेख़ा थे ये महबूब-ए-ख़ुदा ठहरे
अज्ञात
कलाम
दिल जिगर को आश्ना-ए-दर्द-ए-उल्फ़त कर दियाइक निगाह-ए-नाज़ ने सामान-ए-राहत कर दिया
अब्दुल हादी काविश
कलाम
तुम्हें मैं जानता हूँ तुम बदलते हो हज़ारों रंगनहीं मैं ग़ैर उठा कर पर्दा-ए-रू-ए-बशर आओ
आग़ा मोहम्मद दाऊद
कलाम
ले चल हरीम-ए-नाज़ में ऐ ज़ौक़-ए-बंदगीआज उनके के पा-ए-नाज़ पे सज्दा करेंगे हम
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
दूर जब तक रहे हम बा-दिल-ए-नाशाद रहेपास हम तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम-ईजाद रहे
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
हो गया मा’लूम टूटा जब तिलिस्म-ए-ज़िंदगीमा'रिफ़त ऐ’न-ए-ख़ुदा की है ये ’इरफ़ान-ए-हयात
अब्दुल हादी काविश
कलाम
पढ़ो बादा-गुसारो अब नमाज़-ए-ख़ुद फ़रामोशीसदा-ए-क़ुलक़ुल-ए-मीना हुई तकबीर-ए-मय-ख़ाना