परिणाम "mausam"
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इस्मत-ए-तौबा को ठुकराने का मौसम आ गयाआगया पी कर बहक जाने का मौसम आ गया
आया जो मौसम-ए-गुल तो ये हिसाब होगाहम होंगे यार होगा जाम-ए-शराब होगा
वो ‘अर्बदा जो मा'सूम अदा क़ातिल भी है और क़ातिल भी नहींदिल उस की अदा-ए-सादा का बिस्मिल भी है और बिस्मिल भी नहीं
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चाँदअपनी रात की छत पर कितना तन्हा होगा चाँद
पी पी पी ले ज़रा झूम केआज मौसम बड़ा सुहाना है
शराब नग़्मा जवानी घटाएँ मौसम-ए-गुलसदाएँ वो मिरे गुज़रे हुए ज़माने को
जब वो होते हैं सेहन-ए-गुलशन मेंमौसम-ए-नौ-बहार होता है
न काली घटाएँ न फूलों का मौसममगर पीने वाले पिए जा रहे हैं
मौसम-ए-गुल में वो जो आन मिलेंहम भी जानें कि रुत सुहानी है
रफ़्ता-रफ़्ता वाक़िआ'त-ए-दर्द याद आने लगेचुपके चुपके अश्क बरसाने का मौसम आगया
खुल जावेगा ज़ुहहाद पे रिंदों का तक़द्दुसमौसम तो क़रीब आने दो तौबा-शिकनी का
ये उदासियों के मौसम यूँही राएगाँ न जाएँकिसी याद को पुकारो किसी दर्द को जगाओ
मोहब्बत नीला मौसम बन के आ जाएगी इक दिनगुलाबी तितलियों को फिर सहारा कौन देगा
बरसात का तो मौसम कब का निकल गया परमिज़्गाँ की ये घटाएँ अब तक बरसतियाँ हैं
किसी मौसम की फ़क़ीरों को ज़रूरत न रहीआग भी अब्र भी तूफ़ान भी साग़र से उठा
कुछ रोज़ अभी सब्र कर ऐ पंजा-ए-वहशतबे-मौसम-ए-गुल लुत्फ़ नहीं जामा-दरी का
यूँही मौसम की अदा देख के याद आया हैकिस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसाँ जानाँ
ख़ुश्बू शबनम रंग सितारे करते हैं दीवाना-साउस पर तेरे क़ुर्ब का मौसम लगता है अफ़्साना-सा
सय्याद देख ली कशिश-ए-मौसम-ए-बहार कीउड़ उड़ के बाग़ में मिरा एक एक पर गया
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