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कलाम
इक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली हैइक होश-रुबा इनआ'म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है
क़तील शिफ़ाई
कलाम
न हिकायत-ए-ग़म-ए-'इश्क़ है न हदीस-ए-साग़र-ओ-जाम हैतिरा मय-कदा है वो मय-कदा जहाँ लफ़्ज़-ए-होश हराम है
कौसर आरफ़ी
कलाम
महफ़िल-ए-रिंदाँ में जाम मुल का होना चाहिएज़ोहद का क़ुल हो चुका क़ुलक़ुल का होना चाहिए
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
न तो मय-कदे की है जुस्तुजू न तलाश-ए-बादा-ओ-जाम हैजो नफ़्स नफ़्स को पिला गई मुझे उस निगाह से काम है
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
न हदीस मय की तलाश है न ग़रज़ हिकायत-ए-जाम सेतेरी इक नज़र ने बचा लिया मुझे गुमरही के मक़ाम से
मख़मूर देहलवी
कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
ये फ़ज़ा ये चाँदनी रातें ये दौर-ए-जाम-ओ-मयमस्तियों में ग़र्क़ हो जाने का मौसम आगया
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
फ़ना का जाम ऐ साक़ी मैं पी-पी लूँ तू भर-भर देबक़ा की मय से आँखें मिस्ल-ए-नर्गिस-ए-मस्त कर-कर दे
अलाउद्दीन जलाली
कलाम
जिस का दिल जाम-ए-फ़ना से हर घड़ी सरशार हैउस की सूरत है कहाँ वो सूरत-ए-दिलदार है