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कलाम
दिया होता किसी को दिल तो होती क़द्र भी दिल कीहक़ीक़त पोछिए जा कर किसी बिस्मिल से बिस्मिल की
अज्ञात
कलाम
अपनी निगाह-ए-शौक़ को रोका करेंगे हमवो ख़ुद करें निगाह तो फिर क्या करेंगे हम
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
दूर जब तक रहे हम बा-दिल-ए-नाशाद रहेपास हम तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम-ईजाद रहे
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
ऐ जान-ए-जहाँ कब तक ये गोशा-ए-तन्हाईसब दीद के तालिब हैं जितने हैं तमाशाई
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
इक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली हैइक होश-रुबा इनआ'म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है
क़तील शिफ़ाई
कलाम
न हिकायत-ए-ग़म-ए-'इश्क़ है न हदीस-ए-साग़र-ओ-जाम हैतिरा मय-कदा है वो मय-कदा जहाँ लफ़्ज़-ए-होश हराम है
कौसर आरफ़ी
कलाम
अनवर फ़र्रूख़ाबादी
कलाम
न तो मय-कदे की है जुस्तुजू न तलाश-ए-बादा-ओ-जाम हैजो नफ़्स नफ़्स को पिला गई मुझे उस निगाह से काम है
इक़बाल सफ़ीपुरी
कलाम
न हदीस मय की तलाश है न ग़रज़ हिकायत-ए-जाम सेतेरी इक नज़र ने बचा लिया मुझे गुमरही के मक़ाम से
मख़मूर देहलवी
कलाम
महफ़िल-ए-रिंदाँ में जाम मुल का होना चाहिएज़ोहद का क़ुल हो चुका क़ुलक़ुल का होना चाहिए
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
सताइश-गर है ज़ाहिद इस क़दर जिस बाग़-ए-रिज़वाँ कावो इक गुलदस्ता है हम बे-ख़ुदों के ताक़-ए-निस्याँ का
मिर्ज़ा ग़ालिब
कलाम
जिस का दिल जाम-ए-फ़ना से हर घड़ी सरशार हैउस की सूरत है कहाँ वो सूरत-ए-दिलदार है