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कलाम
एह तन रब्ब सच्चे दा हूजरा विच पा फ़क़ीरा झाती हून कर मिन्नत ख़्वाज ख़िज़र दी तैं अंदर आब हयाती हू
सुल्तान बाहू
कलाम
शकील बदायूँनी
कलाम
नई शान से हुआ जल्वा-गर वो जहाँ पे जल्वा-कुनाँ हुआकहीं बे-गुमान-ओ-गुमाँ बना कहीं बे-निशान-ओ-निशाँ हुआ
बेदम शाह वारसी
कलाम
एह तन रब सच्चे दा हुजरा विच पा फ़कीराँ झाती हून कर मिन्नत ख़्वाजा ख़िज़र दी तैं अंदर आब हयाती हु
सुल्तान बाहू
कलाम
खयाल-ए-मा-सिवा पी की नगरिया कैसे ले जाऊँवो यक्ता है मैं दूजे की गगरिया कैसे ले जाऊँ
अब्दुल हादी काविश
कलाम
बा'द अज़ फ़ना मज़ार पे आने से फ़ाइदामरने से हम मिटे तो जलाने से फ़ाइदा