यह किताब तसव्वुफ़ की हक़ीक़ी रूह, उसकी पाकीज़ह रिवायत और अहद-ए-रिसालत से लेकर अकाबिर सूफ़िया व मशाइख़ तक उसके इरतिक़ा का तफ़सीली जायज़ा पेश करती है। इसमें मौजूदा दौर में तसव्वुफ़ की ग़लत तशरीहात और बिदअतों का तजज़िया किया गया है और हक़ीक़ी सूफियाना इक़दार को वाज़ेह किया गया है। यह किताब नाम निहाद सूफ़ियों और तसव्वुफ़ को ग़लत रंग देने वालों की परदादरी भी करती है।