हीर राँझा के इश्क़िया दास्तान मशहूर-ओ-मारूफ़ है।जो हक़ीक़तन पंजाबी के अज़ीम क्लासिकी अदब की एक ग़ैर-फ़ानी और आफ़ाक़-ओ-गीर शौहरत रखने वाली दास्तान-ए-मोहब्बत है।जिसको अबदुलहमीद अदम साहिब ने उर्दू में मुंतक़िल किया है।ज़बान-ओ-बयान सादा और सलीस ,रवां और रमज़ीहती है।अदम साहिब ने पंजाबी कलाम को उर्दू में हूबा हो मुंतक़िल किया है।इस कलाम में वही तरन्नुम ,सोज़ वगदाज़ है जो पंजाबी कलाम की ख़ासीयत है