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Sufinama

पिया आओ बसाओ नगरिया हमरी

शाह तुराब अली क़लंदर

पिया आओ बसाओ नगरिया हमरी

शाह तुराब अली क़लंदर

पिया आओ बसाओ नगरिया हमरी

मोरा मंदिरवा राखो जनि सूना

देखो आन अटरिया हमरी

भूल गई कस सुरत इधर की

काहे लेत खबरिया हमरी

बाट चलन भयो दूभर हम का

छेंके हैं बैरी डगरिया हमरी

तुम छुट काजिम काको पुकारूँ

कौन सुने यह गुहरिया हमरी

दुख की फुहार पड़त है देखो

भीजै पावै चुनरिया हमरी

याही अरज है 'तुराब' की हजरत

पार लगा दो निवड़िया हमरी

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