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त'आलल्लाह चे दौलत दारम इमशब

हाफ़िज़

त'आलल्लाह चे दौलत दारम इमशब

हाफ़िज़

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    त'आलल्लाह चे दौलत दारम इमशब

    कि आमद ना-गहाँ दिल-दारम इमशब

    ईश्वर महान है कि आज की रात मुझे क्या दौलत मिली है, आज की रात अचानक मेरा महबूब गया।

    चु दीदम रू-ए-ख़बूबश सज्द: कर्दम

    बे-हम्दिल्लाह नेको किर्दारम इमशब

    जब मैं ने उस का हसीन चेहरा देखा तो सज्दा किया, ईश्वर की कृपा से मैं आज की रात नेकी करने वाला बन गया हूँ।

    निहाल-ए-'ऐशम अज़ वसलश बर-आवुर्द

    ज़-बख्त-ए-ख़्वेश बर-खु़र्दारम इमशब

    मेरी ज़िंदगी के पौधे ने उस के मिलन का फल दिया, आज की रात मेरी तक़्दीर जाग गई।

    कशद नक़्श-ए-अनल-हक़ बर ज़मीं ख़ूँ

    चु मंसूर अर कशी बर्दारम इमशब

    अगर आज की रात तू मुझे मंसूर की तरह सूली पर चढ़ाएगा तो, ज़मीन पर गिरा हुआ ख़ून अनल-हक़ का नक़्शा खींच देगा।

    बरात-ए-लैलतुल-क़द्रे ब-दस्तम

    रसीद अज़ ताले'-ए-बे-दारम इमशब

    लैलतुल-क़द्र का सवाब मुझे आज की रात, मेरे जागते भाग्य की वजह से मिल गया।

    बराँ ’अज़्मम कि गर ख़ुद मी-रवद सर

    कि सर-पोश अज़ तबक़ बर्दारम इमशब

    मैंने इस का इरादा कर लिया है कि अगर मेरा सर जाता है जाता रहे तो आज की रात थाल से ढांकने वाला कपड़ा हटा दूं।

    तू साहिब ने'मती मिन मुस्तहिक्क़़म

    ज़कात-ए-हुस्न देह हक दारम इमशब

    तू दाता है और मैं पाने योग्य हूँ, मुझे अपने हुस्न की ज़क़ात दे क्यूँकि आज की रात मुझे इसका हक़ है।

    हमी-तर्सम कि 'हाफ़िज़' महव गर्दद

    अज़ ईं शोरे कि दर सर दारम इमशब

    मुझे डर है कि ‘हाफ़िज़ लीन हो जाएगा, उस शोर से जो आज की रात मेरे सर में है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दीवान-ए-हाफ़िज़ (पृष्ठ 48)
    • रचनाकार :हाफ़िज़ शीराज़ी
    • प्रकाशन : प्रोग्रेसिव बुक्स, लाहाैर

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