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Sufinama

हिकायात- 19

शैख़ अ'ली हिज्वेरी रहमतउल्लाह अ'लैह ने जब कश्फ़ुलमहजूब लिखी तो शुरु किताब में अपने नाम का ज़िक्र किया। उसके बा'द दो तीन जगह और (ज़िक्र फ़रमाया) और फिर अपना नाम लिखने की वज्ह यह बयान फ़रमाई कि मैंने इस से पहले अर'बी अशआ'र कहे थे और उनमें अपना नाम कहीं नहीं लाया था। एक जवान मर्द ने (यह ग़ज़ब ढाया कि) यह सारे अशआ'र अपने नाम कर लिए और इन्तिक़ाल के वक़्त बेईमान गया।

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