Font by Mehr Nastaliq Web

दीवाने का जालीनूस की तरफ़ तवज्जोह करना- दफ़्तर-ए-दोउम

रूमी

दीवाने का जालीनूस की तरफ़ तवज्जोह करना- दफ़्तर-ए-दोउम

रूमी

MORE BYरूमी

    रोचक तथ्य

    ترجمہ: مرزا نظام شاہ لبیب

    जालीनूस ने अपने शागिर्दों से कहा कि मुझको फ़ुलाँ दवा निकाल दो। एक शागिर्द ने उस से पूछा कि हज़रत ये दवा तो जुनून में दी जाती है। जान से दूर, भला ये दवा आप खाएँगे? कहा कि हाँ मेरी तरफ़ एक दीवाना मुतवज्जिह हुआ था। वो थोड़ी देर तक तो मुझे घूरता रहा फिर मुझे आँख मारी और उस के बा’द मेरी आस्तीन फाड़ डाली। अगर मुझमें कोई हम-जिंसी की बात ना पाता तो वो मेरी तरफ़ रुख़ ही क्यों करता। जब दो शख़्स आपस में मिलें तो यक़ीन करना चाहिए कि उनमें कोई मुश्तरक निस्बत मौजूद है।

    कोई परिंद ब-ग़ैर अपने हम-जिंस ग़ोल के कब उड़ता है। इस की तमसील में एक शख़्स ने बयान किया कि मैंने एक बयाबान में कव्वे और कलंग को बड़े चाव से पास पास बैठे देखा मैं ये हाल देखकर इस फ़िक्र में डूब गया कि उनमें मुश्तरक तअ’ल्लुक़ क्या होगा। इसी हैरत में जब मैं उनके नज़दीक पहुंचा तो मैंने देखा कि वो दोनों लंगड़े थे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हिकायात-ए-रूमी हिस्सा-1 (पृष्ठ 76)
    • प्रकाशन : अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) (1945)

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए