Font by Mehr Nastaliq Web

ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा

हफ़ीज़ जालंधरी

ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा

हफ़ीज़ जालंधरी

MORE BYहफ़ीज़ जालंधरी

    दिल तोड़ के जाने वाले दिल दिल बात बात बताता जा

    अब मैं दिल को क्या समझाऊँ मुझ को भी समझाता जा

    हाँ मेरे मजरूह तबस्सुम ख़ुश्क लबों तक आता जा

    फूल की हस्त-ओ-बूद यही है खिलता जा मुरझाता जा

    मेरी चुप रहने की 'आदत जिस कारन बदनाम हुई

    अब वो हिकायत 'आम हुई है सुनता जा शर्माता जा

    ये दुख-दर्द की बरखा बंदे दीन है तेरे दाता की

    शुक्र-ए-ने’मत भी करता जा दामन भी फैलाता जा

    जीने का अरमान करूँ या मरने का सामान करूँ

    'इश्क़ में क्या होता है नासेह 'अक़्ल की बात सुझाता जा

    तुझ को अब्र-आलूद दिनों से काम चाँदनी रातों से

    बहलाता है बातों से बहलाता जा बहलाता जा

    दोनों संग-ए-राह-ए-तलब हैं राह-नुमा भी मंज़िल भी

    ज़ौक़-ए-तलब हर एक क़दम पर दोनों को ठुकराता जा

    नग़्मे से जब फूल खिलेंगे चुनने वाले चुन लेंगे

    सुनने वाले सुन लेंगे तू अपनी धुन में गाता जा

    आख़िर तुझ को भी मौत आई ख़ैर 'हफ़ीज़' ख़ुदा-हाफ़िज़

    लेकिन मरते मरते प्यारे वज्ह-ए-मर्ग बताता जा

    वीडियो
    This video is playing from YouTube

    Videos
    This video is playing from YouTube

    अज्ञात

    अज्ञात

    स्रोत :
    • पुस्तक : कुल्लियात-ए-हफ़ीज़ जालंधरी (पृष्ठ 434)

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए