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अपनी जन्नत को ख़ुदा के लिए दोज़ख़ न बना

क़ैसर सिद्दीक़ी समस्तीपुरी

अपनी जन्नत को ख़ुदा के लिए दोज़ख़ न बना

क़ैसर सिद्दीक़ी समस्तीपुरी

MORE BYक़ैसर सिद्दीक़ी समस्तीपुरी

    अपनी जन्नत को ख़ुदा के लिए दोज़ख़ बना

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    मेरे मालिक मेरे आक़ा मेरे मौला ने कहा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    बाप के प्यार से अच्छी कोई दौलत क्या है

    माँ का आँचल जो सलामत है तो जन्नत क्या है

    ये हैं राज़ी तो नबी राज़ी हैं राज़ी है ख़ुदा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    उन की ममता ने ब-हर-हाल संभाला तुझ को

    किस क़दर प्यार से माँ बाप ने पाला तुझ को

    रहमत-ए-मौला से कुछ कम नहीं साया उन का

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    जब भी देखा तो तुझे प्यार से देखा माँ ने

    ख़ून-ए-दिल दूध की सूरत में पिलाया माँ ने

    तू ने इस प्यार के बदले उसे कुछ दिया

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    हर मुसीबत से बचाया ये करम है कि नहीं

    बोलना तुझ को सिखाया ये करम है कि नहीं

    कैसे पाला तुझे माँ बाप ने क्या तुझ को पता

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    तुझ को इंसान बनाया तुझे ता'लीम भी दी

    कभी देखी ही नहीं उन की मोहब्बत में कमी

    क्या दिया तू ने मगर उन की मोहब्बत का सिला

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    उन की चाहत की बदौलत है कहानी तिरी

    उन की क़ुर्बानी का सदक़ा है जवानी तिरी

    अपनी आवाज़ को नादान तू पत्थर बना

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    देख कर तेरी जवानी को ये मसरूर हुए

    जो किए फ़ैसले तू ने उन्हें मंज़ूर हुए

    तिरी हर बात पे माँ बाप ने लब्बैक कहा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    तेरे माँ बाप ने शादी भी रचाई तिरी

    किस क़दर धूम से बारात सजाई तिरी

    तू मगर उन के ख़यालात से बेगाना रहा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    बीवी के आते ही चलने लगी नफ़रत की हवा

    तुझ को बर्बाद कर दे ये 'अदावत की हवा

    यूँ गुनहगार बन ख़ुद को गुनाहों से बचा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    बूढे माँ बाप को घर से जो निकाला तू ने

    कर लिया अपने मुक़द्दर को भी काला तू ने

    बाज़ वर्ना ख़ुदा भी तुझे बख़्शेगा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    जिस ने की तुझ से वफ़ा उस को सताने वाले

    कल तिरे नाम पे थूकेंगे ज़माने वाले

    तुझ से नाराज़ नबी हैं तो ख़ुदा भी है ख़फ़ा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    तिरे माँ बाप ने किस प्यार से पाला तुझ को

    ख़ुद रहे भूके दिया मुँह का निवाला तुझ को

    उन की मुट्ठी में है नादान मुक़द्दर तेरा

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    तेरे बेटे भी कहाँ रोटियाँ देंगे तुझ को

    ये भी तेरी ही तरह गालियाँ देंगे तुझ को

    तू भी है साहिब-ए-औलाद ये क्यूँ भूल गया

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

    उन से अच्छी नहीं देखी कोई सूरत 'क़ैसर'

    हैं सरापा ये मोहब्बत ही मोहब्बत 'क़ैसर'

    काम आती है बड़े वक़्त में उन की ही दु'आ

    अपने माँ बाप का तू दिल दुखा दिल दुखा

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