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Sufinama

ख़्वाजा पिया मोहे दरस दिखा दो चैन न आवत नैनन में

अमीर बख़्श साबरी

ख़्वाजा पिया मोहे दरस दिखा दो चैन न आवत नैनन में

अमीर बख़्श साबरी

MORE BYअमीर बख़्श साबरी

    रोचक तथ्य

    منقبت در شان غریب نواز خواجہ معین الدین چشتی (اجمیر-راجستھان)

    ख़्वाजा पिया मोहे दरस दिखा दो चैन आवत नैनन में

    अंगना बुहारूँ तन-मन वारूँ आन बसो मोरे आँगन में

    दीन-ओ-धरम ईमान तुम्हीं हो दान करो भगवान तुम्हीं हो

    तुमरी दया की धूम मची है ख़्वाजा पिया संसारों में

    ख़्वाजा-ए-'उस्माँ के राज-दुलारे आन पड़ी मैं तुमरे द्वारे

    ढाँप लो मोरे औगुन ख़्वाजा गुन नाहीं कोई पापन में

    ख़्वाजा पिया तोरे दर की भिकारन दर की भिकारन तुमरी पुजारन

    पाइयो रे भगवान का दरसन ख़्वाजा पिया तोरे दरसन में

    ख़्वाजा पिया सख़ियों के सख़ी हो कृपा करो कृपा के धनी हो

    तुमरी दिया की सन के खबरिया आँ पड़ी तोरे चरनन में

    या ख़्वाजा अब ये सूजत है तुम सुनूँ तो कौन सन्त है

    तुमरी दहरिया पे गुजरी 'उमरिया धड़कन कलपन तड़पन में

    ख़्वाजा क़ुतबुद्दीं का सदक़ा बाबा फ़रीदुद्दीं का सदक़ा

    अब तो 'अमीर' को दरस दिखा दो मोरा जन्म तो रे दरसन में

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