हमारा दिल जिस पे मुब्तला है अबुल-’उला है अबुल-’उला है

हमारा दिल जिस पे मुब्तला है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
निसार अकबराबादी
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रोचक तथ्य
منقبت در شان حضرت سیدنا امیر ابوالعلا
हमारा दिल जिस पे मुब्तला है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
ज़माना जिस शाह से गदा है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
जो हू-बहू शक्ल-ए-मुस्तफ़ा है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
जो सर-ब-सर शान-ए-किब्रिया है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
हमारा क़िब्ला हमारा का'बा हमारा आक़ा हमारा मौला
अबुल-’उला है अबुल-’उला है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
मलक पर ये जिन्न-ओ-इंस ही क्या तमाम 'आलम है उस का शैदा
हर एक तरफ़ शोर हो रहा है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
ग़ुलाम जिस के कहलाते हैं हम जहाँ पर आँखें बिछाते हैं हम
जो हम ग़रीबों का आसरा है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
है चश्मा-ए-फ़ैज़ जिस का जारी करम की जिस की है आबशारी
जो कश्ती-ए-दिल का ना-ख़ुदा है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
जो 'अर्श मंज़िल है आस्ताना जहाँ अदब से है सर झुकाना
'निसार' जिस पर मिटा हुआ है अबुल-’उला है अबुल-’उला है
- पुस्तक : कुल्लियात ए निसार
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