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ख़लिश होती है इक महसूस पैहम

नज्म अहसन निग्रामी

ख़लिश होती है इक महसूस पैहम

नज्म अहसन निग्रामी

MORE BYनज्म अहसन निग्रामी

    ख़लिश होती है इक महसूस पैहम

    क़यामत सी मची है दिल में हर दम

    तुई ऐ शाह-ए-महबूबाँ पनाहम

    ज़-महजूरी बर आमद जान-ए-’आलम

    तरह्हुम या नबी-अल्लाह तरह्हुम

    कमर बार-ए-गुनह से हो गई ख़म

    करूँ किस तर्ह मैं अपना ही मातम

    सहारा है तिरा रहम-ए-मुजस्सम

    ज़-महजूरी बर आमद जान-ए-’आलम

    तरह्हुम या नबी-अल्लाह तरह्हुम

    सरों तक आ गया अब आह पानी

    नहीं दरिया-ए-ग़म की कम रवानी

    तुई मक़्सूद-ए-हम महबूब-ए-जानी

    बुरूँ आवर सर अज़ बुर्द-ए-यमानी

    कि रू-ए-तुस्त सुब्ह-ए-ज़िंदगानी

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