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सलाम

MORE BYसंजर ग़ाज़ीपुरी

    मोरे अहमद कमली वाले तुम पर लाखों सलाम

    अबदुल्लाह के नूर-ए-नज़र हो

    आमनः के लख़्त-ए-जिगर हो

    शाह-ए-दो-आलम ख़ैरुल-बशर हो

    दाई-हलीमा के पाले तुम पर लाखों सलाम

    नूर-ए-ख़ुदा महबूब-ए-ख़ुदा हो

    नाम-ए-मोहम्मद सल्ले-अला हो

    रुत्बे में नबियों से सिवा हो

    शान-ए-नबुव्वत वाले तुम पर लाखों सलाम

    अर्श-ए-बरीं पर हक़ ने बुलाया

    जल्व: अपना आप दिखाया

    रुत्बः आ'ला आप ने पाया

    जग के तुम हो उजाले तुम पर लाखों सलाम

    नबियों के सरताज बने हो

    उम्मत के मेराज तुम्हीं हो

    सब की रख्या लाज तुम्हीं हो

    उम्मत के रखवाले तुम पर लाखों सलाम

    बुत-ख़ानः को का'बः बनाया

    दीन का हर-सू डंका बजाया

    सारे जहाँ को कलमः पढ़ाया

    तुम हो अल्लाह वाले तुम पर लाखों सलाम

    हर-दम छाई ग़म की घटा है

    उम्मत पर नाज़िल ये बला है

    बेड़ा भँवर में आन फँसा है

    पड़ गए जान के लाले तुम पर लाखों सलाम

    होगा बपा जब रोज़-ए-महशर

    तिश्नः-लब उम्मत घबरा कर

    अर्ज़ करेगी साक़ी-ए-कौसर

    दे दे भर भर प्याले तुम पर लाखों सलाम

    'संजर' की तक़दीर जगा दो

    बिगड़ा हर एक काम बना दो

    उजड़ा हुआ घर इस का बसा दो

    तुम हो रहमत वाले तुम पर लाखों सलाम

    स्रोत :
    • पुस्तक : दीवान-ए-संजर अल-मा'रूफ़ गुलदस्ता-ए-कलाम-ए-संजर (पृष्ठ 149)
    • रचनाकार : संजर ग़ाज़ीपूरी
    • प्रकाशन : शैख़ ग़ुलाम हुसैन ऐंड संस ताजिरान-ए-कुतुब, कश्मीरी बाज़ार, लाहौर

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