Sufinama

बैसाख- भजन कर भगवान् को मन, आइयो बैसाख रे ।

तुलसीदास (ब्रजवासी)

बैसाख- भजन कर भगवान् को मन, आइयो बैसाख रे ।

तुलसीदास (ब्रजवासी)

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    भजन कर भगवान् को मन, आइयो बैसाख रे

    घटत छिन छिन अवधि तेरी, जायगी मिलि खाख रे ।।

    कठिन काल कराल सिर पर, करि अचानक घात रे

    नाम बिन जमदंड त्रासन, कोइ दैहै हाथ रे ।।

    सीस दस दुर्योधनादिक, गये सब मिलि धूर रे

    हरि बिमुख बिश्राम नाहीं, समुझि देखो कूर रे ।।

    नीर बुल्ला जस कुसुम रँग, ऐसही संसार रे

    सार-केवल नाम हरि को, ताहि नाहिँ बिसार रे ।।

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