गुफ़्तम कि रौशन चूँ क़मर गुफ़्ता कि रुख़्सार-ए-मनस्त
गुफ़्तम कि रौशन चूँ क़मर गुफ़्ता कि रुख़्सार-ए-मनस्त
गुफ़्तम कि शीरीं अज़ शकर गुफ़्ता कि गुफ़्तार-ए-मनस्त
मैंने कहा चाँद से ज़्यादा कुछ रौशन है? उसने कहा मेरे रुख़्सार (चेहरा), मैंने कहा शकर से ज़्यादा मीठा कुछ है? उसने कहा मेरी गुफ़्तार (बातचीत)
गुफ़्तम तरीक़-ए-'आशिकाँ गुफ़्ता वफ़ादारी बुवद
गुफ़्तम मकुन जौर-ओ-जफ़ा गुफ़्ता कि ईं कार-ए-मनस्त
मैंने कहा ’आशिक़ों का उसूल क्या है? उसने कहा महबूब से वफ़ादारी, मैंने कहा कि जौर-ओ-जफ़ा (ज़ुल्म) न कीजिए, उसने कहा ये तो मेरा काम है
गुफ़्तम कि मर्ग-ए-'आशिकाँ गुफ़्ता कि दर्द-ए-हिज्र-ए-मन
गुफ़्तम 'इलाज-ए-ज़िंदगी गुफ़्ता कि दीदार-ए-मनस्त
मैंने कहा ’आशिक़ों की मौत क्या है? उसने कहा मेरे हिज्र (विरह) का दर्द, मैंने कहा ज़िंदगी का इलाज क्या है? उसने कहा मेरा दीदार
गुफ़्तम बहारी या ख़िज़ाँ गुफ़्ता कि रश्क-ए-हुस्न-ए-मन
गुफ़्तम ख़जालत कब्क रा गुफ़्ता कि रफ़्तार-ए-मनस्त
मैंने कहा तू बहार है या ख़िज़ाँ (पतझड़), उसने कहा कि वो मेरे हुस्न पर रश्क-कुनाँ (जिसके गुणों को देख प्रतिद्वंदी को ईर्ष्या हो) हैं, मैंने कहा कि चकोर की शर्मिंदगी क्या है, उसने कहा कि मेरी रफ़्तार
गुफ़्तम कि हूरी या परी गुफ़्ता मनम शाह-ए-बुताँ
गुफ़्तम कि 'ख़ुसरव'-ए-ना-तवाँ गुफ़्ता परस्तार-ए-मनस्त
मैंने कहा कि ये हूर-ओ-परी क्या है? उसने कहा कि मैं ख़ूबरूओं का बादशाह हूँ मेरा मक़ाम उनसे बुलंद है, मैंने कहा कि खुसरौ तू ना-तवाँ (कमज़ोर) है, उसने कहा मेरा परस्तार ( पूजने वाला) तो है
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