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गर जल्वः देहद रू-ए-ताबान-ए-मुहिउद्दीन

हकीम शोएब फुलवारवी

गर जल्वः देहद रू-ए-ताबान-ए-मुहिउद्दीन

हकीम शोएब फुलवारवी

MORE BYहकीम शोएब फुलवारवी

    गर जल्वः देहद रू-ए-ताबान-ए-मुहिउद्दीन

    नक़्द-ए-दिल-ओ-जाँ साज़म क़ुर्बान-ए-मुहिउद्दीन

    अगर जनाब मुहीउद्दीन (हज़रत मौलाना शाह मोहम्मद मुहीउद्दीन क़ादरी फुलवारवी, सज्जादा-नशीं ख़ानक़ाह-ए-मुजीबिया, वफ़ात: 1366 हिजरी) का रौशन चेहरा जल्वा-अफ़रोज़ हो जाए, तो मैं अपनी जान और दिल मुहीउद्दीन पर क़ुर्बान कर दूँ।

    अनवार-ए-जमाल-ए-ऊ अज़ नूर-ए-ख़ुदा रौशन

    ख़ू-ए-नबवी बंगर दर शान-ए-मुहिउद्दीन

    उनके जमाल के अनवार अल्लाह के नूर से रौशन हैं,

    मुहीउद्दीन की शान में सीरत-ए-नबवी को देखो।

    ख़्वाही कि शवी बे-ख़ुद अज़ कैफ़-ए-मय-ए-वहदत

    यक जु'र्अः कश अज़ जाम 'इरफ़ान-ए-मुहिउद्दीन

    अगर मय-ए-वहदत के नशे से बे-ख़ुद होना चाहते हो,

    तो शाह मुहीउद्दीन के इरफ़ान का एक जाम पी लो।

    अज़ बादियः-ए-ग़ैबत बा-मश्'अलः-ए-'इरफ़ाँ

    दर 'ऐन शुहूद आमद ईमान-ए-मुहिउद्दीन

    बादिया-ए-ग़ैब से इरफ़ान की मशअल लेकर शाह मुहीउद्दीन का ईमान अब ऐन-ए-शुहूद में चुका है (यानी ग़ैब पर ईमान, उनके इरफ़ानी मरातिब की वजह से उनका ईमान-बिल-ग़ैब, गोया ईमान-बिश्शुहूद हो गया।

    'नय्यर' ब-वफ़ा-ए-ऊ सौगंद कि मी-बाशम

    हर लहज़ः ज़-जान-ओ-दिल ख़ूबान-ए-मुहिउद्दीन

    मैं उनके हुक्म और फ़रमान से कभी अलग नहीं होऊँगा। एक ज़माना हो गया है कि मैंने मुहीउद्दीन से अहद बाँध लिया है (यानी अमीर-ए-शरीअत होने के नाते उनके अहकाम का पाबंद हूँ)।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 271)
    • रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First

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