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हुमाँ अस्ल-ए-महेश्वर बूद: शब शाहे कि मन दीदम

अज्ञात

हुमाँ अस्ल-ए-महेश्वर बूद: शब शाहे कि मन दीदम

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    हुमाँ अस्ल-ए-महेश्वर बूद: शब शाहे कि मन दीदम

    ग़ज़नफर चर्म-दर बर-बूद शब-शाहे कि मन दीदम

    जिन्हें उस रात्रि मैंने देखा, वास्तव में वही तो शिव थे

    उन्हें जब उस रात मैंने देखा, तो उन्होंने सिंह-चर्म धारण किया हुआ था

    उमा अज़ सू-ए-चप-बीनगर ज़े सद-ख़ुर्शीद ताबाँ तर

    मकानश ला-मकाँ-तर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    उमा! अपने बाईं ओर देखो कि सैंकड़ों सूरज़ों से भी अधिक प्रकाशवान और चमकीला है

    वह, जिस का मकान, ला-मकाँ से भी आगे है, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    बदस्तश आब-ए-कौसर नेज़ा-ओ-नाकूस-ओ-नीलोफ़र

    सवार-ए-कुल्बा-ए-नर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    उन के हाथ में क़ौसर का प्याला था और वे भाला, घंटी और कमल से सुसज्जित थे।

    वह एक बलशाली नर बैल की पीठ पर सवार थे, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    से चश्मश बर-जबीं ख़ुश-तर ज़े मेहर-ओ-माह रौशन तर

    हिलालश ताज-बर-सर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    उन का तीसरा नेत्र, सूरज और चाँद की तरह चमक रहा था

    पहला चाँद उन के सर पर ताज की तरह सुशोभित था, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    ज़े भस्मश जामा-ए-बर तन ज़ुनारश मार दर गर्दन

    रवानश गंग अज़ सर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    उन्होंने शरीर पर भस्म रमाई हुई थी, गर्दन में रुद्राक्ष की माला सुशोभित थी

    उन के केशों से गंगा प्रवाहित हो रही थी, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    हयात-ओ-मौत-ओ-तक़दीर-ओ-क़ज़ा कद़्र-ओ-ख़ुदावंदी

    ब-फ़रमाइश मुसख्खर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    जीवन और मृत्यु, भाग्य के साथ-साथ ईश्वरत्व भी

    उन की आज्ञा के अधीन थे, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    ब-पुरसीदम पुदाँ-मस्ती किनाँ-मस्ती चिग़ाँ-मस्ती

    सरोशम गुफ्त शंकर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    मैंने पूछा कि मेरे पैर, मेरी कमर और मेरी आँखें सब मस्त क्यों हैं?

    ईशवाणी गूँजी कि शंकर थे, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    अजब सन्यासी-ए-दीदम, नमो-नारायना गुफ़्तम

    ब-ख़ाक-ए-पाश बोसीदम शब शाहे कि मन दीदम

    मैंने नमो-नारायण पुकारता हुआ एक सन्यासी देखा

    मैंने उस की चरण-धूलि को प्रणाम किया, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

    मनम मर्द-ए-मुसलमानम अली ख़ानम हमीं दानम

    ख़ुदा-ए-बंदा परवर बूद शब शाहे कि मन दीदम

    मैं अली ख़ान, एक मुस्लिम हूँ और मुझे बस इतना पता है कि

    वह भक्तों का पालनहार ईश्वर था, वही रात्रि के शासक जिन्हें मैंने देखा

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