मकीन-ए-ला-मकाँ बाशद मोहम्मद
मकीन-ए-ला-मकाँ बाशद मोहम्मद
निशान-ए-बे-निशाँ बाशद मोहम्मद
मोहम्मद ला-माक़ाँ के निवासी हैं, (यानी उनका जो मक़ाम और दर्जा है, उसकी हक़ीक़त इंसानी अक़्ल से परे है)।
आप बे-निशानों के निशान हैं, (यानी जिन्हें हक़ की मंज़िल का पता नहीं मिलता, उनके लिए आपकी हस्ती ही मंज़िल का पता है। आप अल्लाह के रसूल हैं, आप ख़ुद भी मंज़िल हैं और मंज़िल का पता भी)।
ज़-नूर-ए-ऊस्त पैदा हर-चे बीनी
हमः कौन-ओ-मकाँ बाशद मोहम्मद
जो कुछ तुम देखते हो, वो सब उनके नूर का प्रकट रूप है। (मशहूर रिवायत के मुताबिक सारी मख़्लूक़ उनके नूर से पैदा हुई और वे ख़ुद अल्लाह के नूर से हैं)। आप सारा ही कौन-ओ-मकान हैं (इस अर्थ में सारा जहाँ उनके नूर से है और उन्हीं की वजह से है)।
ब-'अहद-ए-ख़ुद न-तन्हा बूद पैदा
ब-हर-जुज़्व-ए-ज़माँ बाशद मोहम्मद
आप केवल अपने ज़माने में ही प्रकट नहीं थे, बल्कि हर दौर में मौजूद रहे (इस अर्थ में कि आपकी नुबूव्वत का नूर आपके पूर्वजों में झलकता रहा और आप हर युग में समय का हिस्सा रहे)।
जहाने याफ़्त अज़ वे रुस्तगारी
नजात-ए-दो-जहाँ बाशद मोहम्मद
ज़माने को आपके माध्यम से गुमराही से छुटकारा मिला, आप दोनों जहाँ की नजात का ज़रिया हैं।
हमः चश्मेम ऊ नूर-ए-बसारत
हमः जिसमेम-ओ-जाँ बाशद मोहम्मद
आपकी हैसियत ये है कि हम सब आँख की तरह हैं और आप हमारी आँखों की रौशनी हैं। हम सब शरीर के समान हैं और आप उसमें आत्मा की तरह हैं।
चे ग़म दारी ज़-'इस्यान-ए-ख़ुद ऐ 'नस्र'
शफ़ी'-ए-'आसियाँ बाशद मोहम्मद
ऐ ‘नस्र’! अपने गुनाहों की चिंता क्यों करता है? हज़रत मोहम्मद गुनाहगारों के शफ़ी’ (सिफ़ारिश करने वाले) हैं।
- पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 205)
- रचनाकार : शाह हेलाल अहमद क़ादरी
- प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
- संस्करण : First
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