या रसूल-ए-'अरबी क़िब्लः-ए-हाजात रवा
या रसूल-ए-'अरबी क़िब्लः-ए-हाजात रवा
मुस्तग़ीस आमदः-अम चारः-ए-कारम फ़र्मा
ऐ रसूल-ए-अरबी, क़िब्ला-ए-हाजात मेरी हाजत पूरी फ़रमाइए, मैं फ़रियादी बनकर आया हूँ, मेरी चारागरी कीजिए।
दर्दमंदम जिगर-रीश मरा मरहम नेह
चारः-साज़ अकरम-ए-तुस्त ब-हर-मरज़-ए-दवा
मैं दर्दमंद हूँ मेरे ज़ख़्मी जिगर पर मरहम रखिए، ऐ चारासाज़ आप हर मरज़ की दवा हैं।
दिल-ए-पुर अज़ आबल: दारम ज़-हुजूम-ए-रंज
ऐ नसीम-ए-करमत 'उक़्दा-कुशा-ए-दिल-हा
रंज़-ओ-ग़म के हुजूम से मेरा दिल आबलों से भरा हुआ है, ऐ जिनके लुत्फ़-ओ-करम की नसीम दिलों की गिरहें खोल देती है मेरी भी गिरह-कुशाई फ़रमाइए।
हस्त ता'बीर-ए-यदुल्लाह ज़-दस्त करमत
ज़ेर-ए-दस्त-ए-अलमम दस्त देह ऐ दस्त-ए-ख़ुदा
आपका दस्त-ए-करम ख़ुदा का हाथ है, और मैं रंज़-ओ-मुसीबत के हाथों गिरफ़्तार हूँ ऐ दस्त-ए-ख़ुदा मुझे सहारा दीजिए।
बहर-ए-ज़हरा-ओ-’अली-ओ-हसन-ओ-बहर-ए-हुसैन
नज़र-ए-लुत्फ़ ब-हालम ब-कुन ऐ 'उक़्दा-कुशा
हज़रत अली, हज़रत फ़ातिमा और हज़रत हसन-ओ-हुसैन रज़िअल्लाहु अन्हुम के तुफ़ैल मेरे हाल पर नज़र-ए-करम फ़रमाइए ऐ उक़्दा-कुशा।
जुज़ दरत नीस्त मरा जा-ए-पनाहे दीगर
कीस्त ता हाल ब-पुर्सद ज़-मन ऐ 'फ़र्द' गदा
आपके दर के सिवा मेरी कोई और पनाह नहीं, आपके सिवा कौन है
जो मुझ फ़र्द का हाल पूछे।
- पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 137)
- रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
- प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
- संस्करण : First
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