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मोहम्मद आबरू-ए-दिलबरानस्त

नस्र फुलवारवी

मोहम्मद आबरू-ए-दिलबरानस्त

नस्र फुलवारवी

MORE BYनस्र फुलवारवी

    मोहम्मद आबरू-ए-दिलबरानस्त

    मोहम्मद ताब-ए-मू-ए-महविशानस्त

    मोहम्मद ही सच्चे महबूब की प्रतिष्ठा और सम्मान हैं। यानी सुंदर लोगों की ज़ुल्फ़ों की शोभा भी उन्हीं से कायम है।

    चु नर्गिस चश्म-ए-निगरानेस अज़ शौक़

    मोहम्मद रंग-ओ-बू-ए-बोसतानस्त

    मेरी आँखें शौक़ में नर्गिस के फूल की तरह देख रही हैं कि फूलों को रंगत और बाग़ को खुशबू भी मोहम्मद ही से मिली है।

    ख़ुदा चूँ मी-कुनद बर दिल तजल्ली

    मोहम्मद होश-ओ-गोश-ए-’आरिफ़ानस्त

    जब अल्लाह ता’ला आरिफ़ों (ईश्वर को पहचानने वालों) के दिलों पर अपनी तजल्लियाँ प्रकट करता है (और वे उस तजल्ली ताब को सह कर पाने के कारण कभी-कभी मस्ती और बेख़ुदी में शरीअत के रास्ते से हटने लगते हैं), तो मोहम्मद ही उनके होश और गोश बन जाते हैं। (यानी उन्हें सँभालते हैं और अपनी रूहानी तवज्जोह से स्थिर कर देते हैं, जिससे वे सुलूक (आध्यात्मिक यात्रा) के मुक़ामात में दृढ़ बने रहते हैं।

    ब-'आलम जुज़ मोहम्मद नीस्त पैदा

    दिगर हर-चे बुवद वह्म-ओ-गुमानस्त

    दुनिया में आप के सिवा वास्तव में कोई चीज़ स्वतंत्र रूप से मौजूद नहीं, जो कुछ दिखाई देता है वो केवल वह्म और गुमान है। क्योंकि आपके नूर से ही सारी सृष्टि को अस्तित्व मिला है, इसलिए मूल अस्तित्व तो आप ही का है, और बाक़ी सब आपके अस्तित्व की छाया और प्रतिबिंब हैं।

    दो-'आलम क़ालिब आमद दर तन-ए-'नस्र'

    मोहम्मद दरमियानश हम-चु जानस्त

    जब दोनों जहान (दुनिया और आख़िरत) ‘नस्र’ के शरीर की तरह एक ढाँचे के समान हुए, तो उनके बीच मोहम्मद आत्मा की तरह हैं। यानी जिस तरह शरीर में जान का स्थान होता है, उसी तरह इस पूरी सृष्टि, धरती और आसमान में आपकी स्थिति आत्मा के समान है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसुल क़ुदस (पृष्ठ 168)
    • रचनाकार : शाह हेलाह अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First

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