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नूर-ए-हिदायत रू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

हसरत अज़ीमाबादी

नूर-ए-हिदायत रू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

हसरत अज़ीमाबादी

MORE BYहसरत अज़ीमाबादी

    नूर-ए-हिदायत रू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

    सायः-ए-रहमत मू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

    मोहम्मद का मुबारक चेहरा हिदायत का नूर है। मोहम्मद के बाल रहमत की छाया हैं।

    कर्द ब-हर जानिब इशारत सज्द: नुमूदंद अहल-ए-बशारत

    क़िब्लः-ए-जाँ अब्रू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

    जिस ओर आपने इशारा किया, खुशख़बरी पाने वालों ने सर झुका दिया।

    मोहम्मद की भवें दिलों का क़िब्ला हैं।

    'इश्क़-ए-ख़ुदा रा सिलसिलः-ए-जुम्बाँ जाज़िब-ए-दिल-हा जानिब-ए-यज़्दाँ

    सिलसिलः-ए-गेसू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

    मोहम्मद की ज़ुल्फ़ों की ये लड़ी ईश्वर के प्रेम की ओर दिलों को झिंझोड़ती है, और दिलों को अल्लाह की ओर खींच ले जाती है।

    गरचे न-दीदम रू-ए-मोहम्मद गश्तम असीर-ए-मू-ए-मोहम्मद

    जाँ ब-देहम ब-रू-ए-मोहम्मद सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम

    हालाँकि मैंने मोहम्मद का चेहरा नहीं देखा, फिर भी मैं उनके बालों का दीवाना हो गया हूँ। मैं तो मोहम्मद के चेहरे पर अपनी जान निछावर करता हूँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 253)
    • रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First

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