सलामुन 'अलैका ऐ नबी-ए-मुकर्रम
मुकर्रम तर अज़ आदम-ओ-नस्ल-ए-आदम
ऐ आदरणीय नबी! आप पर सलाम हो,
आप आदम और आदम की सारी संतान से अधिक सम्मानित हैं।
सलामुन 'अलैका ऐ ज़-आबा-ए-'उल्वी
ब-सूरत मुअख़्ख़र ब-मा'नी मुक़द्दम
आप पर सलाम हो، आप अपने पूर्वजों के, बाद में आए,
लेकिन दर्जे और बुलंदी में सबसे पहले हैं।
सलामुन 'अलैका ऐ ज़-आग़ज़-ए-फ़ितर
तुफ़ैल-ए-वुजूद-ए-तु ईजाद-ए-'आलम
आप पर सलाम हो, क्योंकि सृष्टि के पहले दिन से ही
आपके कारण यह दुनिया अस्तित्व में आई।
सलामुन 'अलैका ऐ ज़-अस्मा-ए-हुसना
जमाल-ए-तु आईनः-ए-इस्म-ए-आ'ज़म
आप पर सलाम हो आपका हर नाम प्यारा है,
आपका सौंदर्य ही ईश्वर के महान नाम का प्रकाश है।
तुई या-रसूलल्लाह आँ बहर-ए-रहमत
कि बाशद मुहीत अज़ 'अता-ए-तु यक-नम
ऐ अल्लाह के रसूल! आप रहमत के सागर हैं,
आपकी दया और दान दोनों जहानों को घेरे हुए हैं।
जिगर तिश्नः-गानेम अज़ रह रसीदः
तरह्हुम 'अलेना बिमा-ए-तरह्हुम
हम रास्ता चलते-चलते बहुत प्यासे हो गए हैं,
हम पर दया कीजिए, रहमत का जल हमें प्रदान कीजिए।
जज़ाकल-लज़ी 'अम्मा-जूदन-ओ-बर्रन
व-अरज़ाका 'अना-ओ-सल्ले-व-सल्लिम
अल्लाह आपको इसका उत्तम बदला दे, आपकी उदारता थल और जल हर जगह फैली हुई है। अल्लाह हमें आपसे राज़ी करे, आप पर बेहिसाब दुरूद और सलाम हो।
- पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 245)
- रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
- प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
- संस्करण : First
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