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सलामुन 'अलैका ऐ नबी-ए-मुकर्रम

जामी

सलामुन 'अलैका ऐ नबी-ए-मुकर्रम

जामी

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    सलामुन 'अलैका नबी-ए-मुकर्रम

    मुकर्रम तर अज़ आदम-ओ-नस्ल-ए-आदम

    आदरणीय नबी! आप पर सलाम हो,

    आप आदम और आदम की सारी संतान से अधिक सम्मानित हैं।

    सलामुन 'अलैका ज़-आबा-ए-'उल्वी

    ब-सूरत मुअख़्ख़र ब-मा'नी मुक़द्दम

    आप पर सलाम हो، आप अपने पूर्वजों के, बाद में आए,

    लेकिन दर्जे और बुलंदी में सबसे पहले हैं।

    सलामुन 'अलैका ज़-आग़ज़-ए-फ़ितर

    तुफ़ैल-ए-वुजूद-ए-तु ईजाद-ए-'आलम

    आप पर सलाम हो, क्योंकि सृष्टि के पहले दिन से ही

    आपके कारण यह दुनिया अस्तित्व में आई।

    सलामुन 'अलैका ज़-अस्मा-ए-हुसना

    जमाल-ए-तु आईनः-ए-इस्म-ए-आ'ज़म

    आप पर सलाम हो आपका हर नाम प्यारा है,

    आपका सौंदर्य ही ईश्वर के महान नाम का प्रकाश है।

    तुई या-रसूलल्लाह आँ बहर-ए-रहमत

    कि बाशद मुहीत अज़ 'अता-ए-तु यक-नम

    अल्लाह के रसूल! आप रहमत के सागर हैं,

    आपकी दया और दान दोनों जहानों को घेरे हुए हैं।

    जिगर तिश्नः-गानेम अज़ रह रसीदः

    तरह्हुम 'अलेना बिमा-ए-तरह्हुम

    हम रास्ता चलते-चलते बहुत प्यासे हो गए हैं,

    हम पर दया कीजिए, रहमत का जल हमें प्रदान कीजिए।

    जज़ाकल-लज़ी 'अम्मा-जूदन-ओ-बर्रन

    व-अरज़ाका 'अना-ओ-सल्ले-व-सल्लिम

    अल्लाह आपको इसका उत्तम बदला दे, आपकी उदारता थल और जल हर जगह फैली हुई है। अल्लाह हमें आपसे राज़ी करे, आप पर बेहिसाब दुरूद और सलाम हो।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 245)
    • रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First

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