ज़-दर्द-ए-हिज्र-ए-तु दिल-फ़िगारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
ज़-दर्द-ए-हिज्र-ए-तु दिल-फ़िगारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
नस्र फुलवारवी
MORE BYनस्र फुलवारवी
ज़-दर्द-ए-हिज्र-ए-तु दिल-फ़िगारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
ज़-शौक़ि-ए-वस्ल-ए-तु बे-क़रारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
मैं आपकी जुदाई में दिल से घायल हूँ। आइए मोहम्मद, आइए मोहम्मद यानी मुझ पर ध्यान दीजिए या अपनी ज़ियारत का सौभाग्य दीजिए। मैं आपके मिलन की चाह में बेचैन हूँ। आइए मोहम्मद, आइए मोहम्मद।
ज़-दाग़-ए-'इश्क़-ए-तु दाग़-दारम दरून-ए-सीनः चु लालः-ज़ारम
ब-बीं बहारम ब-बीं बहारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
आपके इश्क़ ने मेरे दिल को घायल कर दिया है और मेरा सीना लाल फूलों के बाग़ की तरह भर गया है। मेरी इस बहार पर नज़र कीजिए। आइए मोहम्मद, आइए मोहम्मद।
ब-वक़्त-ए-मर्ग अर तुरा न बीनम ज़-रहमत-ए-तू उम्मीदवारम
कि लुत्फ़ फ़र्मा तु बर मज़ारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
अगर मौत के वक़्त मैं आपको न देख सकूँ, तो भी आपकी रहमत से उम्मीद है कि आप मेरी क़ब्र पर करम फरमाएँगे। आइए मोहम्मद, आइए मोहम्मद (यानी क़ब्र में आपकी ज़ियारत होगी)।
सबा ब-गोशश अगर तवानी ज़-'नस्र'-ए-मिस्कीं ब-गो पयामे
कि 'उम्र बाशद दर इंतिज़ारम बिया मोहम्मद बिया मोहम्मद
ऐ सबा! अगर हो सके तो मेरा यह पैग़ाम उन तक पहुँचा दे कि इंतज़ार में मेरी सारी उम्र गुज़र गई। अब तो आइए मोहम्मद, आइए मोहम्मद।
- पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 210)
- रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
- प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
- संस्करण : First
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