Font by Mehr Nastaliq Web

दरख़्त अगर मुतहर्रिक बुदी बपा-ओ-बपर

रूमी

दरख़्त अगर मुतहर्रिक बुदी बपा-ओ-बपर

रूमी

MORE BYरूमी

    दरख़्त अगर मुतहर्रिक बुदी ब-पा-ओ-ब-पर

    रंज-ए-अर्रह कशीदी ज़ख़्म-हा-ए-तबर

    वर आफ़्ताब न-रफ़्ती ब-पर-ओ-पा हर शब

    जहाँ च-गूना मुनव्वर शुदी ब-गाह-ए-सहर

    वर आब-ए-तल्ख़ न-रफ़्ती ज़े-बहर-ए-सू-ए-उफुक़

    कुजा हयात-ए-गुलिस्ताँ शुदी ब-सैल-ओ-मतर

    चू क़तरा अज़ वतन-ए-ख़्वेश रफ़्त-ओ-बाज़ आमद

    मुसादिफ़-ए-सदफ़ी गश्त-ओ-शुद यकी गौहर

    यूसुफ़ी ब-सफ़र रफ़्त अज़ पिदर ग़िर्याँ

    दर सफ़र ब-सआ’दत रसीद-ओ-मुल्क-ओ-ज़फ़र

    मुस्तफ़ा ब-सफ़र रफ़्त जानिब-ए-यसरब

    ब-याफ़्त सल्तनत-ओ-ग़श्त शाह सद किश्वर

    गर तू पाय न-दारी सफ़र गुज़ीन दर ख़्वेश

    चू कान-ए-ला’ल पज़ीरा शौ अज़ शुआ’अ-ए-असर

    ज़-ख़्वेश्तन सफ़री कुन ब-ख़्वेश ख़्वाजा

    कि अज़ चुनीं सफ़री गश्त ख़ाक मा’दिन-ए-ज़र

    ज़-तल्ख़ी-ओ-तुर्शी रू-ब-सू-ए-शीरीनी

    चुनाँ-कि रुस्त ज़-तल्ख़ी हज़ार-गूना समर

    ज़-‘शम्स’ मफ़ख़र-ए-‘तबरेज़’ ईं अजायब बीं

    अज़ आँ कि हर शजर अज़ नूर-ए-‘शम्स’ याबद फ़र

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए