Sufinama

mi-KHwastam ki roza-gushaem namaz-e-sham

Amir Khusrau

mi-KHwastam ki roza-gushaem namaz-e-sham

Amir Khusrau

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    INTERESTING FACT

    Translation: Amara Ali

    mī-ḳhvāstam ki roza-gushā.em namāz-e-shām

    sar bar zad āftāb-e-jahāñ-soz-e-man ze-bām

    मैं चाहता था कि शाम के वक़्त रोज़ा खोलूँ मेरा चमकता हुआ सूरज बाम पर गया

    qāmateñ ki sarv-e-sahī gar ba-bīndash

    yak sitāda ba-qayāmat kunad qayām

    ऐसी क़द-ओ-क़ामत के साथ कि अगर सर उसको देख ले तो क़यामत तक एक पाँव पर खड़ा रहे

    bardāsht parda az ruḳh va chuuñ roz arza kard

    bar man namāz-e-sub.h ba-vaqt-e-namāz-e-shām

    उसने चेहरे से परदा हटाया तो जैसे दिन निकल आया मुझ पर शाम के वक़्त सुब्ह की नमाज़ वाजिब हो गई.

    karda salām va sar ba-nihādam ba-rū-e-ḳhāk

    har-chand sajda-e-sahv būvad az pai-e-salām

    मैं ने सलाम किया और ज़मीन पर सजदा-रेज़ हो गई, अगर्चे सलाम के बाद सज्दा-सह्व किया जाता है.

    ai īd-e-rozgār nihāñ kun ruḳh chū maah

    bar āshiqān-e-ḳhvesh ma-kun roza harām

    ज़माने की ईद अपना चाँद जैसा चेहरा छुपा लो और अपने आशिक़ों पर रोज़ा हराम करो.

    man be-qarār māñda va barqarār-e-ḳhvesh

    darvesh roza basta va halvā hunūz ḳhaam

    मैं बे-क़रार रहा और तुम अपने वादे पर क़ाएम रहे दुरवेश ने दरवाज़ा बंद कर लिया और हल्वा अभी बना नहीं.

    roza madār chuuñ lab-e-tū pur ze-shakkar ast

    āzād kun ġhulāme ai 'ḳhusravat' ġhulām

    तुम्हारे होंट शक्कर से भरे हुए हैं तुम रोज़ा रखो ग़ुलाम आज़ाद करो ‘ख़ुसरौ’ तुम्हारा ग़ुलाम है

    mi-KHwastam ki roza-gushaem namaz-e-sham

    sar bar zad aaftab-e-jahan-soz-e-man ze-baam

    मैं चाहता था कि शाम के वक़्त रोज़ा खोलूँ मेरा चमकता हुआ सूरज बाम पर गया

    ba qamaten ki sarw-e-sahi gar ba-bindash

    yak pa sitada ta ba-qayamat kunad qayam

    ऐसी क़द-ओ-क़ामत के साथ कि अगर सर उसको देख ले तो क़यामत तक एक पाँव पर खड़ा रहे

    bardasht parda az ruKH wa chun roz arza kard

    bar man namaz-e-subh ba-waqt-e-namaz-e-sham

    उसने चेहरे से परदा हटाया तो जैसे दिन निकल आया मुझ पर शाम के वक़्त सुब्ह की नमाज़ वाजिब हो गई.

    karda salam wa sar ba-nihadam ba-ru-e-KHak

    har-chand sajda-e-sahw buwad az pai-e-salam

    मैं ने सलाम किया और ज़मीन पर सजदा-रेज़ हो गई, अगर्चे सलाम के बाद सज्दा-सह्व किया जाता है.

    ai id-e-rozgar nihan kun ruKH chu mah

    bar aashiqan-e-KHwesh ma-kun roza ra haram

    ज़माने की ईद अपना चाँद जैसा चेहरा छुपा लो और अपने आशिक़ों पर रोज़ा हराम करो.

    man be-qarar manda wa tu barqarar-e-KHwesh

    darwesh roza basta wa halwa hunuz KHam

    मैं बे-क़रार रहा और तुम अपने वादे पर क़ाएम रहे दुरवेश ने दरवाज़ा बंद कर लिया और हल्वा अभी बना नहीं.

    roza madar chun lab-e-tu pur ze-shakkar ast

    aazad kun ghulame ai 'KHusrawat' ghulam

    तुम्हारे होंट शक्कर से भरे हुए हैं तुम रोज़ा रखो ग़ुलाम आज़ाद करो ‘ख़ुसरौ’ तुम्हारा ग़ुलाम है

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