शैख़ को चाहिए कि वो अपने मुरीदों को सलाह दे कि नफ़्स को रियाज़त और मुजाहिदे में झोंक दें। वो कम खाएँ, कम सोएँ और लोगों में कम बैठें। मुरीद अपनी मर्ज़ी से कोई भी काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने दिल को ख़ुदा के ज़िक्र में मसरूफ़ रखना ज़रूरी है।
शैख़ को चाहिए कि वो अपने मुरीदों को सलाह दे कि नफ़्स को रियाज़त और मुजाहिदे में झोंक दें। वो कम खाएँ, कम सोएँ और लोगों में कम बैठें। मुरीद अपनी मर्ज़ी से कोई भी काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने दिल को ख़ुदा के ज़िक्र में मसरूफ़ रखना ज़रूरी है।
नसीरुद्दीन चराग़ देहली
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शैख़ को चाहिए कि वो अपने मुरीदों को सलाह दे कि नफ़्स को रियाज़त और मुजाहिदे में झोंक दें। वो कम खाएँ, कम सोएँ और लोगों में कम बैठें। मुरीद अपनी मर्ज़ी से कोई भी काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने दिल को ख़ुदा के ज़िक्र में मसरूफ़ रखना ज़रूरी है।
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