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सख़्त ज़रूरत के वक़्त, मसलन मेहमान के आने पर, हुक़ूक अदा करने या सिला-रहमी के लिए या बहुत ज़्यादा भूख की हालत में क़र्ज़ ले सकता है, लेकिन अदा करने की कोशिश में लगा रहे।

ख़्वाजा बंदानवाज़ गेसूदराज़

सख़्त ज़रूरत के वक़्त, मसलन मेहमान के आने पर, हुक़ूक अदा करने या सिला-रहमी के लिए या बहुत ज़्यादा भूख की हालत में क़र्ज़ ले सकता है, लेकिन अदा करने की कोशिश में लगा रहे।

ख़्वाजा बंदानवाज़ गेसूदराज़

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    सख़्त ज़रूरत के वक़्त, मसलन मेहमान के आने पर, हुक़ूक अदा करने या सिला-रहमी के लिए या बहुत ज़्यादा भूख की हालत में क़र्ज़ ले सकता है, लेकिन अदा करने की कोशिश में लगा रहे।

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