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साधो सतगुरु की बलिहारि हो ! -राग सोरठि

अमरपुरुषजी महाराज (निरंजनी)

साधो सतगुरु की बलिहारि हो ! -राग सोरठि

अमरपुरुषजी महाराज (निरंजनी)

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    साधो सतगुरु की बलिहारि हो !

    साधो सतगुरु की बलिहारि हो !

    भोजल मांहि जात जीब देख्या, करंगहि कीया पारा हो।।

    भोजल मांहि जात जीब देख्या, करंगहि कीया पापा हो।।

    जन्म मरण का रोग सबल था, तब गुरु वोषद दीया हो।।

    रामनाम निज भेद बताया, तातें रोगी जीया हो।।

    सतगुरु साहिब पर उपगारी, रंका हीरा दीया हो।।

    आदू पंथ बताइ जुगति सूँ, आप सरीखा कीया हो।।

    करम भरम सब दूर निवारे, मेटी मन की आसा हो।।

    रोम रोम आनन्द उपजाया, सुख में सहज निवासा हो।।

    अगमवस्त अन्तर दिखलाई, देख्या अगम तमामा हो।।

    जनसेवादास सतगुरु के सरणै, पूरी मन की आसा हो।।

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