शाफ़े'-ए-रोज़-ए-महशर पे लाखों सलाम
शाफ़े'-ए-रोज़-ए-महशर पे लाखों सलाम
साक़ी-ए-हौज़-ए-कौसर पे लाखों सलाम
क़ासिम-ए-ने’मत-ओ-मालिक-ए-जुज़-ओ-कुल
दोनों 'आलम के सरवर पे लाखों सलाम
'अर्श से आगे जिन की रसाई हुई
या'नी महबूब-ए-दावर पे लाखों सलाम
ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार की खाए क़ुरआँ क़सम
मुस्तफ़ा नूर-ए-पैकर पे लाखों सलाम
उन के रौज़े की हुरमत पे बे-हद दुरूद
उन की मेहराब-ओ-मिम्बर पे लाखों सलाम
हश्र में उम्मती उम्मती की सदा
इस शफ़ा'अत के तेवर पे लाखों सलाम
जिस के सदक़े में जन्नत का मुज़्दा मिले
सज्दा-ए-यौम-ए-महशर पे लाखों सलाम
नाज़-ए-सिदक़-ओ-सफ़ा फ़ख़्र-ए-जूद-ओ-सख़ा
या'नी सिद्दीक़-ए-अकबर पे लाखों सलाम
हज़रत 'उसमाँ की शर्म-ओ-हया पर दुरूद
इब्न-ए-ख़त्ताब-ओ-हैदर पे लाखों सलाम
जिन के बेटे इमाम और शौहर इमाम
सरवर-ए-दीं की दुख़्तर पे लाखों सलाम
फ़ख़्र-ए-आल-ए-पयम्बर कहें हम जिन्हें
या'नी शब्बीर-ओ-शबर पे लाखों सलाम
मज़हर-ए-शान-ए-क़ुदरत हैं ग़ौस-उल-वरा
मा'रिफ़त के समुद्र पे लाखों सलाम
ख़्वाजा-ए-ख़्वाजगाँ दीन-ए-हक़ के मु'ईं
इस्तक़ामत के जौहर पे लाखों सलाम
शाह-ए-बरकत की बरकत पे बे-हद दुरूद
बहर-ए-’इरफ़ाँ के गौहर पे लाखों सलाम
हम को सिखलाई अच्छे बुरे की तमीज़
'आला-हज़रत से रहबर पे लाखों सलाम
'आशिक़-ए-मुस्तफ़ा जिब्रईल-ए-अमीं
उन के नूरानी शहपर पे लाखों सलाम
'इश्क़-ए-अहमद में 'नज़मी' जो सरशार हो
उस के ऊँचे मुक़द्दर पे लाखों सलाम
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