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सूफ़ी उद्धरण
जब इंसान ख़ुद को नेक और अच्छा समझे, तो जान लो कि वो अपनी सब से बुरी हालत में है।
जब इंसान ख़ुद को नेक और अच्छा समझे, तो जान लो कि वो अपनी सब से बुरी हालत में है।
निज़ामुद्दीन औलिया
सूफ़ी उद्धरण
ये बेहतर है कि दूसरों के नेक आमाल को ज़ाहिर किया जाए और उन के बुरे कामों से आँख बचा ली जाए।
ये बेहतर है कि दूसरों के नेक आमाल को ज़ाहिर किया जाए और उन के बुरे कामों से आँख बचा ली जाए।
अहमद रज़ा ख़ान
फ़ारसी कलाम
दर ख़ुद चु नेक दीदम तन-ए-‘नस्र’-ओ-जाँ मोहम्मदज़ौक़े ’अजब चशीदम तन-ए-‘नस्र’-ओ-जाँ मोहम्मद
नस्र फुलवारवी
सूफ़ी उद्धरण
अगर एक आदमी अपना ग़ुस्सा किसी दूसरे इंसान पर निकालता है और दूसरा आदमी सब्र करता है, तो उन में नेक रवैया उस का है, जो सब्र करता है।
निज़ामुद्दीन औलिया
सूफ़ी उद्धरण
रस्मी मुरीद, अगर नेक होगा तो उस वजह से जाना जाएगा और बुरा होगा तो पीर के तुफ़ैल बख़्शा जाएगा। ये दौलत भी कम नहीं है। बहरहाल! पीर ज़रूर होना चाहिए।
शैख़ हुसामुद्दीन मानिकपुरी
सूफ़ी उद्धरण
जो शख़्स इसलिए अपनी इस्लाह कर रहा है कि दुनिया उसकी ता’रीफ़-ओ-इ'ज़्ज़त करे तो उसकी इस्लाह नहीं होगी, अपनी नेकियों का सिला दुनिया से माँगने वाला इन्सान नेक नहीं हो सकता, रिया-कार उस आ’बिद को कहते हैं जो दुनिया को अपनी इ’बादत से डराना चाहे
वासिफ़ अली वासिफ़
सूफ़ी उद्धरण
रात की इबादत और जागने से ख़ुदा के आशिक़ और नेक बंदे ख़ुदा तक पहुँचते हैं और वहदत की ज़िंदगी पा कर अपना मक़सद हासिल कर लेते हैं। ये सब आधी रात की इबादत का फल है। औलिया और अंबिया, दोनों ने रात की तन्हाई में मे'राज पाई।
अब्दुल क़ुद्दूस गंगोही
क़िस्सा
क़िस्सा चहार दर्वेश
इत्तिफ़ाक़ से एक दिन वह नेक बख़्त बीवी हम्माम को गई थी। जब दीवान-ख़ाने में आई
अमीर ख़ुसरौ
सूफ़ी कहानी
चिड़ीमार को एक परिंदे की नसीहत
एक चिड़ीमार ने बड़ी तरकीब से फंदे में चिड़िया पकड़ी। चिड़िया ने उस से कहा ऐ
रूमी
सूफ़ी उद्धरण
मुरीद और पीर का संबंध ऐसा है, जैसे कपड़े में पैबन्द। सच्चा मुरीद, पीर के कहने पर चलता है और उस की मिसाल सफ़ेद कपड़े में लगे सफ़ेद पैबन्द की है, जो धोने पर धुल जाता है और असली कपड़े में ही मिल जाता है। पीर को पहुँचने वाला रूहानी फ़ैज़ ऐसे मुरीद को भी पहुँचता है। रस्मी मुरीद की मिसाल ऐसी है, जैसी सफ़ेद कपड़े पर काला पैबन्द। जिसे पीर का फ़ैज़ तो मिलता है, मगर असली चीज़ कम ही हाथ आती है। रस्मी मुरीद, अगर नेक होगा तो उस वजह से जाना जाएगा और बुरा होगा तो पीर के तुफ़ैल बख़्शा जाएगा। ये दौलत भी कम नहीं है। बहरहाल! पीर ज़रूर होना चाहिए।
मुरीद और पीर का संबंध ऐसा है, जैसे कपड़े में पैबन्द। सच्चा मुरीद, पीर के कहने