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पद
पूस- पूस कीट पतंग होते, किधों तरवर पच्छि रे ।
पूस कीट पतंग होते, किधों तरवर पच्छि रे ।किधों जल के जीव होते, किधों सागर मच्छि रे ।।
तुलसीदास ब्रजवासी
पद
ढूंढै दीप पतंग नै, तौ बषनां बिरद लजाइ।
ढूंढै दीप पतंग नै, तौ बषनां बिरद लजाइ।दीपक माँहैं जोति ह्वै, तौ घणां मिलैगा आइ।।
बषना जी
दोहा
अलि पतंग मृग मीन पुनि इकरस लो पति जीय।
अलि पतंग मृग मीन पुनि इकरस लो पति जीय।'दादन' प्रेम सु क्यों तजे पांचो रस जिहिं पीय।।
दादन
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सूफ़ी लेख
महाकवि सूरदासजी- श्रीयुत पंडित रामचंद्र शुक्ल, काशी।
ऊधो! मनमानो की बात! जरत पतंग दीप में जैसे औ फिरि फिरि लपटात।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
दोहरा
तुका प्रीत राम सूँ तैसी मीठा राख
'तुका' प्रीत राम सूँ तैसी मीठा राखपतंग जाय दीप परे करे तन की खाक
तुकाराम
सूफ़ी लेख
अमीर खुसरो- पद्मसिंह शर्मा
पहले तिय के हीय मैं उमगत प्रेम-उमंग।आगे बाती बरति है, पाछे जरत पतंग।
माधुरी पत्रिका
दकनी सूफ़ी काव्य
तूतीनामा- चुन उस गोहराँ के समन्द का गम्भीर
हो उस नूर के शमा की तू पतंगपरेशा हो फेर चित ग़म सो लाई
मुल्ला ग़व्वासी
पद
पिय थारे रूप भुलानी हो ।
भँवर कँवल रस बोधिया, सुख स्वाद बखानी हो ।।दीपक ज्ञान पतंग सों, मिलि जोति समानी हो ।।
केशवदास
दोहा
कहि 'अहमद' कैसे बने, अनभावठ को संग।
कहि 'अहमद' कैसे बने, अनभावठ को संग।दीपक के मन में नही, जरि जरि मरै पतंग।।
अहमद
कवित्त
प्रीति-विषयक- भानु के प्रकास बिना कंज मुख ठाँप रहे
टापक की ज्योति बिना सीस तो पतंग धुनैनीर के विछोह मीन कैसे करि जी रहै।
ताज जी
कवित्त
तुम तौ तरनि तेज तारिका हरन वह
वह ज्यो पतंग रंग पौन के लगे हौ भंगतुम ज्यौ अनंग रति रंगही के लालसी।।
अहमदुल्लाह
दोहरा
तन दी चिखा बणावे दीपक
तन दी चिखा बणावे दीपक, तां आण जलन परवाने ।भांबड़ होर हज़ारां दिसदे, पर ओस पतंग दीवाने ।
हाशिम शाह
सूफ़ी लेख
कबीर के कुछ अप्रकाशित पद ओमप्रकाश सक्सेना
घाट ओ घाट वाट व सभी, कोटिन में कोउ तरे। दिपक देषी पतंग हलक्यो, जीव देत न डरे।