आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "फबती"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "फबती"
गूजरी सूफ़ी काव्य
ज़ुलेख़ा का सिंगार
अजब फबती थी बेसर नाक भीतर,जुड़े थे नंग उसकू ताज़ा-व-तर।
अमीन गुजराती
सूफ़ी लेख
महाकवि सूरदासजी- श्रीयुत पंडित रामचंद्र शुक्ल, काशी।
गापियों को यह चकपकाहट उद्धव की बात की असंगति पर होती है। जिसने ऐसा सँदेसा भेजा