आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "सबब-ए-हसरत"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "सबब-ए-हसरत"
शे'र
निकल कर ज़ुल्फ़ से पहुँचूँगा क्यूँकर मुसहफ़-ए-रुख़ परअकेला हूँ अँधेरी रात है और दूर मंज़िल है
अकबर वारसी मेरठी
सूफ़ी लेख
क़व्वाली में आदाब-ए-समाअ से इन्हिराफ़ का सबब
अमीर ख़ुसरौ ने अपनी ईजाद कर्दा क़व्वाली हैं जो आदाब-ए-समा’अ को ख़ास अहमियत न दी तो
अकमल हैदराबादी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
हर दम आज़ुर्दगी-ए-ग़ैर-ए-सबब रा चे इलाजमा गुज़शतेम ज़े लुत्फ़-ए-तू ग़ज़ब रा चे इलाज
साएब तबरेज़ी
अन्य परिणाम "सबब-ए-हसरत"
सूफ़ी कहानी
इब्राहीम अदहम के तख़्त-ओ-ताज को तर्क करने का सबब
एक रात वो बादशाह अपनी ख़्वाब-गाह में सो रहे थे और निगहबान चारों तरफ़ पहरा दे
रूमी
शे'र
न आया क्या सबब अब अलग रहा दिल-ए-इंतिज़ार आख़िरजहाँ होवे वहाँ जा कर मुझने होना निसार आख़िर
तुराब अली दकनी
ग़ज़ल
न आया क्या सबब अब अलग रहा दिल-ए-इंतिज़ार आख़िरजहाँ होवे वहाँ जा कर मुझने होना निसार आख़िर
तुराब अली दकनी
ग़ज़ल
बहे हैं अश्क-ए-ख़ूँ रश्क-ए-हिना-ए-यार पर क्या क्यापिसे उ’श्शाक़ के दिल दस्त-ओ-पा-ए-यार पर क्या क्या
हसरत अज़ीमाबादी
सूफ़ी उद्धरण
मुहब्बत ख़ुदा की अस्ल हक़ीक़त है। मुहब्बत ही तमाम चीज़ों की जड़ है, यही दुनिया और आसमानों के वजूद का सबब है।
हुसैन बिन मंसूर हल्लाज
शे'र
उस बुलबुल-ए-असीर की हसरत पे दाग़ हूँमर ही गई क़फ़स में सुनी जब सदा-ए-गुल




