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साखी
पतिब्रता का अंग - आठ पहर चौंसठ घड़ी मेरे और न कोय
आठ पहर चौंसठ घड़ी मेरे और न कोयनैना माहीं तू बसै नींद को ठौर न होय
कबीर
राग आधारित पद
अर्चिक तान - अर्चिक तान जो एक है तामैं कूट जो आठ
अर्चिक तान जो एक है तामैं कूट जो आठ'तानसेन' संगीत मत करि राख्यौ है पाठ
तानसेन
साखी
आठ पहर रोवत रही भरि भरि अँखिया नीर
आठ पहर रोवत रही भरि भरि अँखिया नीरपीर पिया परदेस की जा से भँवर अधीर
तुलसी साहिब हाथरस वाले
ग़ज़ल
जगेशवर प्रसाद ख़लिश
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ग़ज़ल
क़त्ल-गह में उठ गया जब चश्म-ए-क़ातिल का लिहाज़जान की परवा किसे है अब किसे दिल का लिहाज़
अब्दुल्लाह बेदिल
ग़ज़ल
सहर होते ही उठ कर वो जो घर से बाहर आ-निकलाउधर ही इत्तिफ़ाक़न फिरते-फिरते मैं भी जा निकला
ख़्वाजा मीर दर्द
शे'र
उठ के अँधेरी रातों में हम तुझ को पुकारा करते हैंहर चीज़ से नफ़रत हम को हुई हम जन्नत-ए-फ़र्दा भूल गए
अब्दुल हादी काविश
शे'र
उठ के अँधेरी रातों में हम तुझ को पुकारा करते हैंहर चीज़ से नफ़रत हम को हुई हम जन्नत-ए-फ़र्दा भूल गए
अब्दुल हादी काविश
ग़ज़ल
कहो बालीं से उठ जाए तबीब-ए-दुश्मन-ए-जाँ कोविसाल यार काफ़ी है हमारे दर्द-ए-हिज्राँ को