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कलाम
अमीर बख़्श साबरी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ दिल म-बाश ख़ाली यक-दम ज़े-इश्क़-ओ-मस्तीवाँगह ब-रौ कि रस्ती अज़ नेस्ती-ओ-हस्ती
हाफ़िज़
समस्त
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सूफ़ी कहावत
हर कुजा तू बा मनी, मन ख़ुशदिलम, वर बूवद दर क़ा'र चाही मंज़िलम।
मुझे खुशी है जहाँ तू मेरे साथ है, चाहे मुझे कुएँ की गहराई में रहना पड़े।
वाचिक परंपरा
ग़ज़ल
दिया साक़ी ने अव्वल रोज़ वो पैमाना मस्ती मेंकि मैं ना-आश्ना पैकर हुआ दीवाना मस्ती में
