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सूफ़ी लेख
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी और योग पर उनकी किताब "बह्र-उल-हयात"
हज़रत ग़ौस ग्वालियरी शत्तारिया सिलसिले के महान सूफ़ी संत थे. शत्तारी सिलसिला आप के समय बड़ा
सुमन मिश्र
फ़ारसी कलाम
हस्तियत ख़ुद बहर-ए-मोवाजीस्त ना-पैदा कनारक़त्र: बाशद या नमी ज़ाँ बहर-ए-ईं अन्हार-ए-मा
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
रूबाई
जो सुख़न-दान-ए-फ़साहत हैं उन्हें मालूम हैजैसा फ़ैज़-ए-हज़रत-ए-यज़्दानी-ए-मरहूम है
अकबर वारसी मेरठी
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ग़ज़ल
ग़नी है दिल दो-आलम से फ़राग़त उस को कहते हैंहै याद-ए-हक़ फ़क़त दिल में क़नाअत उस को कहते हैं
मर्दान सफ़ी
ग़ज़ल
बहर-जल्वा न रुस्वा कर मज़ाक़-ए-चश्म-ए-हैराँ कोयही बातें निगाहों से गिरा देती हैं इंसाँ को
सीमाब अकबराबादी
पद
अपनी विरह-कथा - मेरे उठी कलेजे पीर घनी
मेरे उठी कलेजे पीर घनी मेरे उठी कलेजे पीर घनीबिन दरसन जियरा नित तरसे चरन ओर रहे दृष्टि तनी
शालीग्राम
कलाम
घनी शाख़ों में छुप कर जब कोई चिड़िया चहकती हैतो मेरे दिल में क्यूँ हसरत की चिंगारी भड़कती है
अहमद नदीम क़ासमी
शे'र
ख़ुदा को याद कर क्यों मुल्तजी है कीमिया-गर सेकि सोना ख़ाक से होता है पैदा ला’ल पत्थर से