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ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ शाह-ए-ज़मन ऐ ख़ैर-ए-बशर बस एक नज़र बस एक नज़रलिल्लाह करें मुझ 'आसी पर बस एक नज़र बस एक नज़र
अब्दुल हमीद साबरी
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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ क़िब्लः-ए-ईमान-ए-मन गाहे नज़र बर मन फ़िगनऐ का'बः-ए-ईक़ान-ए-मन गाहे नज़र बर मन फ़िगन
लताफ़त वारसी
ग़ज़ल
अगर गई है तो क्या गई है नज़र ब-हद्द-ए-नज़र गई हैरहे सलामत तिरी तजल्ली कि ख़ुद उधर से गुज़र गई है
जामी बदायूँनी
ना'त-ओ-मनक़बत
जिस रंग में ऐ यार मुझे तू नज़र आयाऐसा कोई गुल भी नहीं ख़ुश-रू नज़र आया
अब्दुल रहीम कुंजपूरी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ बाद-ए-मुश्क-बू ब-गुज़र सू-ए-आँ-निगारब-कुशा गिरह ज़े-ज़ुल्फ़श व बू-ए-ब-मन बयार
हाफ़िज़
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ ख़ुश आँ रोज़े कि मा बा यार-ए-खुद ख़ुश बूद:-एमबादः-नोशाँ ज़ाँ लब-ए-ला'ल-ए-शक्कर-वश बूदः-ऐम
अमीर ख़ुसरौ
दोहा
विनय मलिका - और नज़र आवै नहीं रंक राव का साह
और नज़र आवै नहीं रंक राव का साहचिरहटा के पँख ज्यों थोथो काम देखाह
दया बाई
कलाम
आख़िर ख़ुदा-ए-बे-निशाँ आया नज़र सिफ़ात मेंसुनते तो थे अज़ल से ही देखा किसी की ज़ात में







