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दोहा
गुरु महिमा का अंग - बंदो श्री सुकदेव जी सब बिधि करो सहाय
बंदो श्री सुकदेव जी सब बिधि करो सहायहरो सकल जग आपदा प्रेम-सुधा रस प्याय
दया बाई
दोहा
विनय मलिका - किस बिधि रीझत हौ प्रभू का कहि टेरूँ नाथ
किस बिधि रीझत हौ प्रभू का कहि टेरूँ नाथलहर मेहर जब हीं करो तब हीं होउँ सनाथ
दया बाई
दोहा
विनय मलिका - भवजल नदी भयावनी किस बिधि उतरूँ पार
भवजल नदी भयावनी किस बिधि उतरूँ पारसाहिब मेरी अरज है सुनिए बारम्बार
दया बाई
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ग़ज़ल
बढ़ा है ज़ौक़-ए-सज्दा इक कशिश सी पाई जाती हैजबीं खींच कर तुम्हारे आस्ताँ तक आई जाती है
फ़ज़्ल नक़वी
दोहा
माँगे घटत रहीम पद कितौ करौ बढ़ि काम
माँगे घटत 'रहीम' पद कितौ करौ बढ़ि कामतीन पैग बसुधा करी तऊ बावनै नाम
रहीम
बैत
यही सबब था जो ज़ुल्फ़ों को थे बढ़ाए हुए
यही सबब था जो ज़ुल्फ़ों को थे बढ़ाए हुएकि आज सारे ज़माने पे हैं वो छाए हुए
फरोग़ वारसी
बैत
बजाए हाथ बढ़ाने के अपने पाँव बढ़ा
बजाए हाथ बढ़ाने के अपने पाँव बढ़ादुआ तो वहम-ए-असर के सिवा और कुछ नहीं
फ़ितरत वारसी
दोहा
लक्कड़ तापै धर्म बढ़े तपशी कहावे संत
लक्कड़ तापै धर्म बढ़े तपशी कहावे संतप्रेम-अगन 'औघट' करे दीन-धरम बिसमंत
औघट शाह वारसी
दोहा
रहिमन ब्याह बिआधि है सकहु तो जाहु बचाय
रहिमन ब्याह बिआधि है, सकहु तो जाहु बचायपायन बेड़ी पड़त है ढोल बजाय बजाय
रहीम
साखी
प्रेम का अंग - जहाँ प्रेम तहँ नेम नहि तहाँ न बुधि ब्यौहार
जहाँ प्रेम तहँ नेम नहि तहाँ न बुधि ब्यौहारप्रेम मगन जब मन भया तब कौन गिनै तिथि बार
कबीर
राग आधारित पद
राग बिहागरा - सुधि बुधि सब गइ खोय री मैं इस्क दिवानी
सुधि बुधि सब गइ खोय री मैं इस्क दिवानीतलफत हूँ दिन रैन ज्यों मछली बिन पानी
