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दोहा
उपदेश गुरू भक्ति का - गुरू के आगे जाय करि ऐसे बोलै बोल
गुरू के आगे जाय करि ऐसे बोलै बोलकछू कपट राखै नहीं अरज करै मन खोल
चरनदास जी
राग आधारित पद
कुब्जा - कुबिजा कौ राज री न्याव ये जासौं गोबिंद बोल बोलै
कुबिजा कौ राज री न्याव ये जासौं गोबिंद बोल बोलैत्रैलोक नाथ हितकर चाहैं सो क्यूँ न ऐंड़ी-बैंड़ी डोलै
तानसेन
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राग आधारित पद
मैं तो सय्याँ को बुलाए लेत तन-मन अपने वार के
मैं तो सय्याँ को बुलाए लेत तन-मन अपने वार केबहुत दिनन के बिछड़े मोहन
मख़दूम ख़ादिम सफ़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
हाथ में ले कर ये बोले मुर्तज़ा कुछ और हैमर्तबा तेग़-ए-नबी का बा-ख़ुदा कुछ और है
उबैद ख़ान मोहसिन
कलाम
तसद्दुक़ अ’ली असद
पद
मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले
मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोलेहीरा पायो गाँठ गठियायो बार-बार बा को क्यूँ खोले
कबीर
ग़ज़ल
मैं ने कहा क्या ज़ीस्त है बोले मिरा इक़रार हैमैं ने कहा है मौत क्या बोले मिरा इंकार है
शाह तक़ी राज़ बरेलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
अपनी दरगाह में मुझ को तू बुला या ख़्वाजाताकि हो जावे मिरा उस में भला या ख़्वाजा
मीर वाजिद अली
ना'त-ओ-मनक़बत
हुदूद-ए-अक़्ल से बाला है 'अज़्मत ग़ौस-ए-आ'ज़म कीख़ुदा ही जनता है शान-ए-रिफ़’अत ग़ौस-ए-आज़म की


