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सूफ़ी उद्धरण
बुलंद हौसला और हिम्मत की बदौलत मुश्किल से मुश्किल काम आसान हो जाता है।
बुलंद हौसला और हिम्मत की बदौलत मुश्किल से मुश्किल काम आसान हो जाता है।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
लालच से ज़िल्लत और संतोष से इज़्ज़त होती है।
लालच से ज़िल्लत और संतोष से इज़्ज़त होती है।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
इश्क़ से इंसान को हमेशा रहने वाली ज़िंदगी मिलती है।
इश्क़ से इंसान को हमेशा रहने वाली ज़िंदगी मिलती है।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी लेख
क़व्वाली ग्यारहवीं शरीफ़ और हज़रत ग़ौस पाक के चिल्लों पर
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के चिल्लों पर क़व्वाली के रिवाज और उसकी मक़्बूलियत के बाद हिन्दोस्तान में
अकमल हैदराबादी
सूफ़ी उद्धरण
दृढ़ता और सीधी राह पर चलना, इंसान के लिए बड़ी नेअमते हैं।
दृढ़ता और सीधी राह पर चलना, इंसान के लिए बड़ी नेअमते हैं।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
जब ख़ुदा साथ हो गया, तो फिर किसी दूसरे मददगार की कोई ज़रूरत नहीं।
जब ख़ुदा साथ हो गया, तो फिर किसी दूसरे मददगार की कोई ज़रूरत नहीं।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
जिस वक़्त तजल्ली-ए-ज़ात होती है, हर तरह से तौहीद और एकत्व के राज़ खुलते हैं।
जिस वक़्त तजल्ली-ए-ज़ात होती है, हर तरह से तौहीद और एकत्व के राज़ खुलते हैं।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
हर शख़्स ने अपनी ख़्वाहिशात के हिसाब से अलग क़िब्ला बना रखा है और उसी में डूबा हुआ है।
हर शख़्स ने अपनी ख़्वाहिशात के हिसाब से अलग क़िब्ला बना रखा है और उसी में डूबा हुआ है।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
दिल की सफ़ाई बग़ैर इबादत के हासिल नहीं होती और ख़ुदा का नूर चेहरे पर बिना दिल की सफ़ाई के नहीं दिखता।
ग़ौस अली शाह
सूफ़ी उद्धरण
दुनिया और उस के तमाम ऐश तुच्छ हैं, इस की ख़त्म हो जाने वाली चमक-धमक पर आशिक़ होना, ज़िंदगी से हाथ धोना है।
ग़ौस अली शाह
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ब-'इश्क़त कुन दिलम या ग़ौस मदहोशज़बानम कुन ब-मदह-ए-ख़्वेश पुर-जोश
शाह अब्दुल क़ादिर बदायूँनी
कलाम
ग़ौस क़ुतुब न उरे उरेरे आशिक़ जाण अगेरे हूजेहड़े मंज़िल आशिक़ पहुंचण ग़ौस न पावण फेरे हू
सुल्तान बाहू
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
तु कि सरख़ैल-ओ-शहनशाह-ए-तरीक़त या-ग़ौसबर तु नाज़ंद असीरान-ए-मोहब्बत या-ग़ौस




