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ग़ज़ल
आ'लम में जल्वा करते हैं किस किस हुनर से आपनूर-ए-नज़र में रहते हैं मख़्फ़ी नज़र से आप
इम्दाद अ'ली उ'ल्वी
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सूफ़ी कहावत
गर हुनरी दारी-ओ-हफ्ताद ऐब, दोस्त ना बीनद बजुज़ आं यक हुनर
अगर आप में एक गुण हो और सत्तर कमियां हों, जो आपको पसंद करता है वह सिर्फ़ वही एक गुण देखेगा।
वाचिक परंपरा
मल्फ़ूज़
क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी
सूफ़ी उद्धरण
ख़ामोशी इल्म का ज़ेवर है और जाहिल की जहालत का पर्दा।
ख़ामोशी इल्म का ज़ेवर है और जाहिल की जहालत का पर्दा।
हज़रत अली
ना'त-ओ-मनक़बत
किया है न करेगा कोई ऐसा मर्हबा सज्दाहुसैन इब्न-ए-'अली तुम ने तो रन में कर लिया सज्दा







