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ना'त-ओ-मनक़बत
क़दमों को रखना अर्ज़-ए-हरम में हिसाब सेइज़हार-ए-'इश्क़ ऐसे हो हज़रत मआब से
उवैस रज़ा अम्बर
सूफ़ी कहावत
आन रा कि हिसाब पाक अस्त अज़ मुहास्बा चे: बाक अस्त
जिसके हिसाब-किताब साफ़ हैं, उसे क्यों डरना
वाचिक परंपरा
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मल्फ़ूज़
क़ाज़ी हमीदुद्दीन नागौरी
सूफ़ी उद्धरण
ख़ामोशी इल्म का ज़ेवर है और जाहिल की जहालत का पर्दा।
ख़ामोशी इल्म का ज़ेवर है और जाहिल की जहालत का पर्दा।
हज़रत अली
सूफ़ी उद्धरण
ख़ुदा ने इंसान को "अशरफ़-उल-मख़लूकात" सबसे अच्छा प्राणी बनाया है और इसके साथ ही उस पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी डाली है।
शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई
शे'र
अब्दुल हादी काविश
शे'र
अर्श गयावी
शे'र
इ'ल्म वालों को शहादत का सबक़ तू ने दियामर के भी ज़िन्दा रहे इंसाँ ये हक़ तू ने दिया
मुज़फ़्फ़र वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
गौहर है 'इल्म कान-ए-जनाब-ए-अमीर काअल्लाह रे रुत्बा शान-ए-जनाब-ए-अमीर का






